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ग्रैनुलेशन क्या है?

6. ग्रैनुलेशन क्या है?

दानेदार बनाना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भौतिक या रासायनिक क्रिया द्वारा कच्चे माल के पाउडर को एकसमान कणों में एकत्रित किया जाता है। इसका उद्देश्य पदार्थ की तरलता में सुधार करना, घटकों के पृथक्करण को रोकना, घुलनशीलता दर को बढ़ाना या बाद की टैबलेट बनाने/पैकेजिंग प्रक्रियाओं के अनुकूल बनाना है। यह ठोस पेय पदार्थ, संपीड़ित कैंडी, दवाइयाँ आदि के उत्पादन में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

दानेदार बनाने की विधि का वर्गीकरण और विशेषताएँ

  • गीला दानेदारकरण

    सिद्धांत: पाउडर में बाइंडर (पानी/इथेनॉल/हाइड्रॉक्सीप्रोपाइल मिथाइलसेलुलोज, आदि) मिलाएं, हिलाकर गीले दाने बनाएं, फिर सुखाकर छान लें।
    लागू: ऐसे दाने जिन्हें उच्च यांत्रिक शक्ति की आवश्यकता होती है (जैसे कि टैबलेट कैंडी बेस)।
    लाभ: एकसमान और सघन दाने, सामग्री के मिश्रण को बेहतर बनाते हैं; कमियां: उच्च ऊर्जा खपत, गर्मी के प्रति संवेदनशील सामग्रियों का आसानी से निष्क्रिय हो जाना
  • शुष्क दानेदार बनाना

    सिद्धांत: पाउडर को सघन परतदार बनाने के लिए उच्च दबाव वाले रोलर प्रेसिंग का उपयोग करें, और फिर बिना तरल मिलाए पूरे दानों को पीस लें।
    लागू: ऐसे तत्व जो नमी के प्रति संवेदनशील होते हैं (जैसे विटामिन सी, प्रोबायोटिक पाउडर)
    लाभ: ऊष्मा से होने वाले नुकसान से बचाव, सरल प्रक्रिया; कमियां: कणों की कठोरता कम, महीन पाउडर की दर अधिक
  • द्रवीकृत बिस्तर दानेदारकरण

    सिद्धांत: हवा में निलंबित चिपकने वाले पदार्थ का छिड़काव करके पाउडर को परत दर परत छिद्रयुक्त कणों में एकत्रित किया जाता है।
    लागू: त्वरित ठोस पेय पदार्थ, चीनी औषधि के दाने
    लाभ: ढीले और घुलनशील कणों के कारण, कोटिंग एक साथ पूरी हो जाती है; नुकसान: उपकरण में भारी निवेश की आवश्यकता होती है।

लागू होने वाले परिदृश्य

● अवयवों की विशेषताएं: ऊष्मासंवेदनशीलता, आर्द्रताशोषकता, घुलनशीलता
 उत्पाद संबंधी आवश्यकताएँ: कणों की मजबूती, घुलने की दर, दिखावट
 उत्पादन पैमाना: निरंतर उत्पादन द्रवयुक्त बेड/स्प्रे ग्रैनुलेशन के लिए उपयुक्त है, छोटे बैच के परीक्षण उत्पादन में अधिकतर गीली/सूखी विधि का उपयोग किया जाता है।

रिसुन के पास वेट/ड्राई/फ्लूइडाइज्ड बेड ग्रैनुलेशन उपकरणों की पूरी श्रृंखला मौजूद है, और यह कच्चे माल की विशेषताओं के अनुसार प्रक्रिया योजना को अनुकूलित कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कणों का विश्राम कोण ≤30° और थोक घनत्व विचलन ≤5% हो, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता में सुधार करने में मदद मिलती है!